| फोटो

निर्देशक : वीरेन्द्र सैनी
निर्माण का वर्ष :2007
अवधि : 91 मिनट
संस्करण : 35 मिमी / हिन्दी
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सार
:
यह एक ग्यारह वर्षीय लड़के
फोटो की यात्रा है जो एक पहाड़ियों में काफ़ी छोटे शहर में
रहता है. इस बहु के आकाश की विभिन्न छवि ' सिनेमा'. में अलगाव
कल्पना के पंखों पर उसकी उड़ान को जिज्ञासा के साथ युग्मित
के अपने खोल से एक यात्रा शुरु होती है
फोटो, कुछ कहते है जो "असामान्य है" ... जिसे अपनी
ही दुनिया मे रहना पसंद है . जिसमें ओरी से टपकाव वर्षाबूंदों
को एक ब्रह्मांड के रुप मे बहुत रहस्य पकड़ना चाहता था. और
फिर एक दिन, फोटो को एक नई दुनिया की चाबी की खोज होती है
. जिस दिन जब एक दूर देश से यात्रियों का एक कारवां उसकी दुनिया
में आए और उनके साथ वर्षा और बिजली, जादू और क्षण, छवि और
रंग, शॉट्स और कथाएँ, ध्वनि और संगीत लाए ... उस दिन जब बंबई
में से एक फिल्म यूनिट उसके घर के बगीचे में शुट करने आती
है .वह दिन जब फोटो की दुनिया पहली बार सिनेमा के जादू को
छुती है . उस दिन फोटो मिलता है उसके 'जादूगर'. से और उसके
'शैतान' से. वह 'जादूगर' एक रोलर कोस्टर की सवारी पर सिनेमा
के लेन्स और एलीज द्वारा उसे ले जाता है. जैसे ही फोटो अपने
जीवन की वास्तविकता और कल्पना की गोते खा रहा था , काफी चरित्रों
ने नया साहस, खोज, शिक्षा और जादू का बहुत रोमांच लाया! कहाँ
इस रोलर कोस्टर की सवारी का अंत होगा ? क्या होगा? क्या जादू
उच्चतम शिखर पर जायेगी? फोटो की दो दुनिया अपनी वास्तविकता
और कल्पना कभी एकसाथ मिल सकेंगे? |