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आसमान गिर रहा हें (दि स्काय इज फोलिंग)
[एनीमेशन]

निर्देशक / पटकथा : सतीश काद्रेकर
निर्माण का वर्ष :1987
अवधि : 11मिनट
संस्करण : 16एमएम/35एमएम/333.14 मीटर, / हिन्दी
कैमरा: एम ए लतिफ़ / भास्कर साई नाईक
संपादन: एन चोबल
संगीत: एन दत्ता

निदेशक का जीवनचरित्र :

सतीश काद्रेकर शुरु में सेना में शामिल करने के विचार पर थे, अपने पिता से प्रोत्साहित उन्होंने उसके बजाय चित्रकला चुना जिससे उनकी कैरियर फिल्म निर्देशक, एनिमेटर, कार्टुनिस्ट और वाणिज्यिक डिजाइनर काद्रेकर ने माधव कुनटे फ़िल्म एनिमेटर को 1967 से 1969 तक सहायता प्रदान की. 1970 के प्रारंभिक सत्तर में उन्होंने विज्ञापन एजेंसी हिन्दुस्तान तोंम्पसन के साथ काम किया. इसके बाद वे स्वतंत्र रुप से एनीमेशन और विशेष प्रभाव पर, फीचर फिल्मों के शीर्षक पर(शाही कपूर की 'अजूबा' के लिए काम कर) और उनकी कई फिल्में बनाई. प्रख्यात फिल्म निर्माता वी. शांताराम, की जीवनी पर काद्रेकर ने किताब डिजाइन किया. काद्रेकर ने कई फिल्म समारोहों में भाग लिया है जिसमे उनकी बनाई फिल्मों में भाग लिये है.

सार :

एक मासूम छोटी ख़रगोश अत्यंत परेशान है और ज़रा भी तेज ध्वनि पर आंदोलन में कूदती है. एक बड़ी पत्ती के अचानक गिरने से उसे आधी मौत जैसा डरती है. एक अविवेकी लोमड़ी "आसमान गिर रहा है भागो" चिल्लाता है!.वह जंगल में पशुओं के बीच डर और तनाव पैदा करता है. सच साकार होनेपर पशुओं उसको सबक सिकाते है.

 

 
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